Friday, July 14, 2023

यह बारिश ये सड़कें

 कल शाम बीकानेर में बारिश हुई। अच्छी थी बारिश, बारानी खेती करने वाले किसानों के लिए बाजरे की बुआई का सबसे अच्छा अवसर है यह! जेठ की शुरुआत में बारिश हो जाने पर बाजरा बो दिया जाय और न्यूनतम जरूरत की बाद की बारिशें भी हो जाय तो बारानी खेती करने वाले किसानों को 'रामÓ मिल जाता है। जेठ में बोए बाजरे को श्रेष्ठ और बरकत वाला माना गया है।

कल हुई बारिश को मौसम विभाग ने 23.2 मिमी. माना है, लेकिन उनका कहना है कि न तो इसे मानसून पूर्व की बारिश कह सकते हैं और न ही इसका कारण पश्चिमी विक्षोभ है। विभाग के जयपुर निदेशालय के सहायक मौसम विज्ञानी के अनुसार यह बारिश मौसम में होने वाले स्थानीय परिवर्तनों के कारण हुई है। किसानों की खेती की जरूरत इससे पूरी हो रही है, लेकिन जिन किसानों का गेहूँ खुले में पड़ा है उनके लिए यह बारिश नुकसान और परेशानी दोनों का कारण बनी।

बारिश और शहर की बात करें तो कल की शाम अधिकतर बीकानेरियों ने सुकून के साथ और रात चैन की नींद के साथ गुजारी होगी। बात करें सड़कों की और पानी निकासी की तो इसकी चिन्ता सड़क बनाने वाले कोई भी विभाग तब नहीं करते हैं जब वह बनाई जाती है, तय मानकों पर कोई सड़क शायद ही बनती है, जगह-जगह सड़कों पर गहराई छोड़ दी जाती है, जहां थोड़ी बारिश से ही पानी इकट्ठा हो जाता है। पानी है और सड़क डामर की है तो वह सड़क वाहन गुजरने पर उखड़ेगी ही। पेवर मशीन से बनने वाली सड़कें जिनमें गहराई रहने की सम्भावना कम रहती है फिर भी जगह-जगह उनमें यह ठेकेदार और अभियन्ता मिलकर गहराई को पता नहीं कैसे सम्भव कर लेते हैं! खैर, यह तो हुई डामर की सड़कों की बात। लेकिन आजकल जो सीमेन्ट कंकरीट (सीसी) से सड़कें बनने लगी हैं, उनमें भी पानी भरने की समस्या है, इसके अलावा आप इन सीसी सड़कों से बिना धचकों के गुजर नहीं सकते हैं।

इन सड़कों को लेकर सरकार विभिन्न विभागों की एक समन्वित कार्यप्रणाली तय क्यों नहीं करती है जिनमें निगम, न्यास, पीडब्ल्यूडी, जलदाय और बिजली विभाग शामिल हों ताकि सड़कें बनते वक्त ही, इन सब विभागों की जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखा जा सके। ताकि सड़कों पर न पानी इक_ा हो और न ही वे बनते ही टूटनी शुरू हो जाये! सड़कें बनते ही जो एक बड़ी समस्या खड़ी होती है वह उन नालियों की है जो सड़कों को क्रॉस करते हुए निकलती हैं और दूसरी सिवरेज के चेम्बरों की होती है जो सड़कों के बीच आये हुए होते हैं। क्यों नहीं सड़कों के टेण्डरों में इस प्रकार की नालियों और सिवरेज चेम्बरों को सड़क बनाने के साथ ही सड़कों के बराबर करने के काम को शामिल किया जाता है। इसी प्रकार पानी और बिजली विभाग के अपने-अपने जरूरी काम सड़क के पुनर्निर्माण होने से पूर्व करने जरूरी कर दिये जायें तो इससे जहां एक ओर सड़क से गुजरने वालों को परेशानी से मुक्ति मिलेगी वहीं ये काम अलग-अलग समय किये जाने के कारण होने वाले सार्वजनिक धन की बर्बादी भी रुकेगी।

दीपचन्द सांखला

14 मई, 2012

No comments: