अंगरेजी का एक शब्द है फिक्स, सामान्यत: यह क्रिया और संज्ञा दोनों रूपों में काम आता है। लेकिन जैसे ही इससे आइएनजी (fixing) जुड़ेगा यह केवल संज्ञा रह जाता है। आज का संपादकीय व्याकरण पर नहीं है, खुद ही इसमें बहुत तंग हैं। जुगाड़ करके तो काम चलाते हैं!
हुआ यह कि कल एक खबर आयी कि क्रिकेट के आईपीएल मैचों में भी फिक्सिंग है। अब यह बड़ी खबर इसलिए नहीं है कि क्रिकेट मोटा-मोट अब व्यापार हो गया और जब व्यापार हो गया है तो जिस मूल्यहीन तरीके से अधिकतर व्यापार होने लगे हैं, क्रिकेट भी उसी तरह ही होगा। इस आईपीएल के बाकायदा मालिक हैं, न केवल आयोजन के बल्कि इनकी टीमों के भी। बोली लगाकर खिलाडिय़ों को खरीदते हैं, आयोजक मोटी रकम पर प्रसारण के अधिकार बेचते हैं, देखने वालों को मोटी रकम में टिकट बेचते हैं, खेल के दौरान थोड़े विराम के तय समयों पर मनोरंजन के लिए चियरगल्र्स होती हैं। मानों, इस खेल में अब रंजन न रहा हो। खिलाडिय़ों के कपड़े, मोजे, टोपी, जूते, बैट, सब पर अपना नाम लगवाने को बड़े-बड़े घरानों के बड़ी-बड़ी रकम के प्रस्ताव आते हैं। थोड़े दिनों में हो सकता है ललाट की बोली भी लगे। उपरोक्त सब एक नंबर के व्यापार के साथ ही इसके कुल टर्नओवर से ज्यादा दो नम्बर का व्यापार भी होता है, जिसमें टिकटों का ब्लैक में बिकना तो ऊंट के मुंह में जीरे से भी कम है। जीत-हार पर अरबों रुपयों के सट्टे होते हैं, इनको ऑपरेट करने वालों को बुकी कहते हैं। यह बुकी खिलाडिय़ों को खरीद कर मैच को फिक्स करते हैं और इस किये जाने को फिक्सिंग नाम दिया गया है। शायद इसीलिए शब्द-कोशों के हर नये संस्करण में कुछ शब्द और कुछ नये अर्थ जुड़ जाते हैं। फिक्सिंग के बाद यह बुकी अपने लाभ के हिसाब से सौदे बुक करते हैं। ग्लोबलाइजेशन के इस युग में सब का और सभी का वैश्वीकरण हो रहा है, इस फिक्सिंग और सट्टे का भी वैश्वीकरण है, कहीं से भी कहीं का भी सौदा किसी भी बुकी के पास बुक करा सकते हैं। इन सौदों के लेन-देन के लिए बैंक जितना ही विश्वसनीय हवाला का नेटवर्क है।
यह सब बताने का कुल जमा मतलब इतना ही है कि अब सभी प्रकार के नियंत्रण परिवार, समाज और राज से निकल कर धन के पास केंद्रित हो रहे हैं। धन को हमारे यहां माया का एक रूप माना गया है।
हमारे शास्त्रों में माया का एक परिचय इस रूप में मिलता है कि वह अधर्म नाम के धर्मविरोधी पुरुष की कन्या थी जिसने 'ब्रह्मÓ नामक अपने ही भाई से 'लोभ' और 'निकृति' नाम के दो पुत्र उत्पन्न किये। लोभ के मानी तो आम है, निकृति के लिए शब्दकोशों में जो अर्थ मिलते हैं वह आपसे साझा करना चाहेंगे। निकृति माने=बहिष्कार, तिरस्कार, पराभव, दीनता, नीचता, प्रतारणा, वंचना, नीच, कमीना आदि-आदि।
यानी समर्थ और समृद्ध या नवसमर्थ और नवसमृद्ध सभी के लिए माया के मोह से बचना नामुमकिन-सा है। लगता है यह माया युग है, कलियुग नहीं। और इस माया की परगा में या प्रभाव क्षेत्र में जो भी आ गया फिर उसका बचना मुश्किल ही है, क्यों कि बा-जरीये कबीर लोक में माया को महाठगिनी कहा गया है।
—दीपचन्द सांखला
15 मई, 2012
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