Thursday, July 13, 2023

आइजी साब

 भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी गोविन्द गुप्ता ने बीकानेर रेंज के महानिरीक्षक, पुलिस का पद कल ग्रहण कर लिया है। इस पद पर बैठे अधिकारी को हमारे यहां आम बोल-चाल में 'आईजी साब' कहा जाता है।

पदारूढ़ होने के बाद कल जब रस्मी तौर पर पत्रकारों के वे मुखातिब हुए तो उन्होंने अपनी तय प्राथमिकताओं को जाहिर किया। जिला या संभाग स्तर का कोई भी अधिकारी ऐसे मौकों पर इस रस्म का निर्वहन करता है और अखबार-टीवी में चित्र व वीडियो क्लिप के साथ खबर भी प्रकाशित-प्रसारित हो जाती है। कल भी ऐसा ही हुआ। आइजी ने संभाग में अपराध पर नियंत्रण, कानून की पालना, आम आदमी की फरियाद सुनना, अवांछित गतिविधियों को रोकना, जिप्सम माफियाओं के पर कतरना आदि-आदि बातें कर अच्छी-अच्छी उम्मीदें जगाने की कोशिश कीं। हर किसी से और हमेशा पहले से ही नाउम्मीदगी जताना भी ठीक नहीं है, हो सकता है यह आईजी साब अपनी बातों पर खरे उतरें।

जिन-जिन उम्मीदों का एजेन्डा उन्होंने घोषित किया है उससे इसकी तो पुष्टि होती ही है कि यह सब कमियां हाल-फिलहाल हैं और इनमें सुधार की गुंजाइश है। उक्त सब कमियों के बारे में प्रत्येक जागरूक नागरिक भी जानता है-पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी यह सब जानते ही होंगे और यह भी सब जानते हैं कि हमारी इस भ्रष्ट और नाकारा व्यवस्था ने झाड़-झंखाड़ इतने बिखेर रखे हैं कि कोई भला अधिकारी हाथ-पांव मारना भी चाहे तो थोड़े दिनों में या तो हांप जाता है या उसी झाड़-झंखाड़ का एक झाड़ होकर रह जाता है।

कहने को चाक-चौबन्द थाने हैं, नफरी है। हों चाहें आधे-अधूरे ही, पर हैं-अधिकारी कमियों की फेहरिस्त सरकार को भेजते रहते हैं-सरकार की भी अपनी रोज बदलती प्राथमिकताएं हैं, जिनमें सर्वोच्च तो सरकार में बैठों को अपनी कुर्सी बचाये रखने की ही होती है और इसी के चलते आधी से ज्यादा प्राथमिकताएं इस कुर्सी को बचाये रखने की ही हो जाती हैं। कोई अधिकारी कुछ सकारात्मक करने के वास्ते चि_ी-पत्री भी करे तो ऐसी पत्रावली फाइलों का अंबार बढ़ाने से ज्यादा कुछ नहीं कर पाती।

बीकानेर के पुलिस महकमें का एक बड़ा काम पुलिस थाना क्षेत्रों का पुनर्सीमांकन है जो लंबे समय से इन्ही फाइलों के अंबार में खोया हुआ है। अभी थाना क्षेत्र इतने विसंगतिपूर्ण हैं कि संबंधित थाना तत्परता से कुछ करना भी चाहे तो उसके लिए संभव नहीं है। अभी तो गृह मंत्रालय में मंत्री भी जिले के ही हैं, उम्मीद की जानी चाहिए कि वे इस कार्य को अपनी प्राथमिकता में लेंगे। इसके अलावा भी पुलिस की ड्यूटी की समय सीमा, छुट्टियां, खाली पदों को भरना व नये पदों का सृजन, सिपाही और निचले स्तर के अधिकारियों के लिए रिफ्रेशर कोर्सेज आदि-आदि की जरूरतें पूरी करना और नवाचार राज्य पुलिस व्यवस्था में करने जरूरी हैं-पता नहीं सरकार इन सबको अपनी प्राथमिकता से कब तक संभव कर पायेगी!

नवनियुक्त आईजी को एक-दो दिन में बीकानेर में हो रहे संगठित अपराधों, अवैध कार्यों की सूचना हो ही जायेगी, ऐसा मान कर चलते हैं-संभव है पिछले अधिकारियों की ही तरह रस्म अदायगी में छोटे जुआरी, पर्ची-सटोरिये, गली-मोहल्लों के शराब के अवैध रिटेलर, जिप्सम के दो-चार ट्रक आदि की धर पकड़ के साथ सुर्खियां बटोर ली जायें और अवैध शराब और अवैध जिप्सम के संगठित और रसूखदार माफियाओं और उत्तर भारत में क्रिकेट सट्टे की बड़ी मण्डी माने जाने वाले इस क्षेत्र में यह सभी कुछ बदस्तूर जारी रहे!

दीपचन्द सांखला

19 अप्रेल, 2012

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