Friday, July 14, 2023

कन्या भ्रूणहत्या

 बीकानेर के जिन लेब, क्लीनिक और अस्पतालों में सोनोग्राफी की मशीन हैं, तय नियम के अनुसार उन सभी जगहों पर एक चेतावनी सूचना टंगी होती है, जिसके माध्यम से यह इत्तला दी जाती है कि गर्भस्थ शिशु का लिंग परिक्षण दंडनीय अपराध है। लेकिन हमारे यहां इस चेतावनी के मानी मोटा-मोट बदल गए हैं। अधिकांशत: इसका मतलब यही लिया जाने लगा है कि यहां लिंग परीक्षण तो होता है लेकिन उसके लिए दबे मुंह और खुले हाथ के साथ बात करनी होनी। गर्भस्थ शिशु के लिंग परीक्षण को लेकर सुना जाता है कि यह नामुमकिन नहीं है, मुश्किल जरूर है। इस तरह की अमानवीय आकांक्षा अधिकांशत: समर्थ और समृद्ध जन में ही पायी जाती है। अत: इसको सीधे-सीधे धर्म, जाति और वर्ग से नहीं जोड़ सकते हैं। क्योंकि इस तरह की दुराकांक्षाएं करते अधिकतर उन्हीं को देखा जाता है जो रोटी, कपड़ा और मकान की चिन्ता से पूरी तरह से मुक्त हो जाते हैं। यह बात अलग है कि इस तरह के लोग अधिकतर उन्हीं वर्गों में से आते हैं जिन्हें सामान्यत: उच्च वर्ग कहा जाता है या फिर वे कुछ लोग हैं जो आरक्षण के चलते न्यूनतम जरूरतों की चिन्ताओं से मुक्त हो गये हैं।

कन्या-भ्रूणहत्या के खिलाफ रस्म अदायगी लगातार होती रही है, चूंकि अपने इस देश को दुनिया के सामने अपना प्रोग्रेसिव और मानवीय चेहरा बनाये रखना है तो इस रस्म को जारी भी रखना होगा! लेकिन देखा गया है हमारे जीवन में तकनीक की घुसपैठ इस कदर बढ़ गई है कि उसने संवेदना के लिए स्थान और अवकाश दोनों ही नहीं छोड़े हैं हमारे भीतर। फिल्म स्टार आमिर खान ने 'सत्यमेव जयते' नाम से एक टीवी शो शुरू किया है जिसके पहले एपिसोड में कन्या भ्रूणहत्या जैसे जरूरी मुद्दे को उठाया गया है और वो भी राजस्थान के सन्दर्भ में। उसमें जिस स्टिंग ऑपरेशन का सर्वाधिक जिक्र है उस स्टिंग में राजस्थान के कुछ सोनोग्राफी करने वालों की वीडियो क्लिप हैं, जिससे पता चलता है कि राजस्थान में कहीं भी यह लिंग परीक्षण नामुमकिन नहीं है, यह स्टिंग आठ साल पुराना बताया गया है। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राष्ट्रीय दलों की सरकारें रहीं और दोनों में ही उस स्टिंग पर अब तक कोई मुस्तैदी नहीं देखी गई थी। स्टिंग करने वाले पत्रकार तकलीफ से यह बताते देखे-सुने गये कि स्टिंग में दिखाई गई सोनोग्राफी मशीनें, लेब, क्लिनिक और अस्पताल आज भी धड़ल्ले से चल रहे हैं, उनका कुछ नहीं बिगड़ा वरन् स्टिंग करने वाले दोनों पत्रकारों को राज्य की विभिन्न अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

आमिर खान के कार्यक्रम के बाद राज्य के मुख्यमंत्री की भी नींद खुली और उन्होंने इस मुद्दे पर सकारात्मक सक्रियता का आश्वासन दिया है। आमिर के बहाने से ही सही, देखना है सरकार और अदालतें इस मानवीय अपराध पर कितनी सक्रिय होती हैं।

वैसे पिछली सरकार के समय हमारे संभाग में यह चर्चा आम थी कि तब के स्वास्थ्य मंत्री सम्भाग के उस डॉक्टर दम्पती के घर एक से अधिक बार रुक कर मेजबानी का अवसर देते रहे हैं जिनका नाम इस इलाके में भ्रूण परीक्षण के लिए सर्वाधिक 'बदÓनाम था।

खैर! इस तरह के मानवीय अपराध तब तक चलते रहेंगे जब तक या तो 'धर्म' की स्थापना नहीं की जाती हैं या फिर कोई भी इस तरह का मानवीय अपराध करे और उसकी एवज में कुछ 'धर्म-कर्म' करके उस पाप से मुक्त होने का रिवाज समाज से खत्म नहीं हो जाता है।

दीपचन्द सांखला

10 मई, 2012

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